भक्त ढूंढे भगवान को,
वक्त तैयार है आजमाने को,
आंसू बहा रक्त के जैसा,
वो लेता है जाने परीक्षा कैसा।
मैं कह न पाया सनम,
इस दिल के सारे दर्दे गम।
मेरे इश्क़ के चिराग में,
दिल जला है तन्हाई के आग में।
हर पल हु खोजता तुजे,
कभी घर मे कभी जिगर में।
पर मिली है तू मुझे,
हर दर्द में हर कहर में।
जबभी लिखा तेरे लिए,
एक इश्क़ का पैगाम था।
मैं डूब गया था तेरी मोब्बत में,
न मेरे हाथ मे जाम था।
जमाना तुझसे दूर न कर पाए।
मैं जिया हु ऐसी ज़िन्दगी,
मैंने तोड़े सारे रिस्ते अभी,
बस लगाई तेरी बंदगी।
अब मैं तेरे खातिर बस,
छोड़ दूंगा ये जमाना।
चाहे लोग फिर कुछ बोले,
मैं बस हु तेरा दीवाना।
मैं शायर हुआ कवि बना,
इस इश्क़ की ताप में।
जमाने ने किया हर बार मना,
पर मैं रमा हु आप में।
No comments:
Post a Comment