Monday, August 31, 2020

शेरों शायरी by Nitish Raj Pathak

भक्त ढूंढे भगवान को,
वक्त तैयार है आजमाने को,
आंसू बहा रक्त के जैसा,
वो लेता है जाने परीक्षा कैसा।

मैं कह न पाया सनम,
इस दिल के सारे दर्दे गम।
मेरे इश्क़ के चिराग में,
दिल जला है तन्हाई के आग में।

हर पल हु खोजता तुजे,
कभी घर मे कभी जिगर में।
पर मिली है तू मुझे,
हर दर्द में हर कहर में।

जबभी लिखा तेरे लिए,
एक इश्क़ का पैगाम था।
मैं डूब गया था तेरी मोब्बत में,
न मेरे हाथ मे जाम था।

जमाना तुझसे दूर न कर पाए।
मैं जिया हु ऐसी ज़िन्दगी,
मैंने तोड़े सारे रिस्ते अभी,
बस लगाई तेरी बंदगी।

अब मैं तेरे खातिर बस,
छोड़ दूंगा ये जमाना।
चाहे लोग फिर कुछ बोले,
मैं बस हु तेरा दीवाना।

मैं शायर हुआ कवि बना,
इस इश्क़ की ताप में।
जमाने ने किया हर बार मना,
पर मैं रमा हु आप में।

शायरी

भूल गया मैं सबकुछ ही,
बस याद तेरा नाम था।
खत्म हो गयी महफ़िल भी,
बस मेरे हाथ मे जाम था।

धरती से मिलने से पहले, 
बादल क्यो गरजते है।
इश्क़ की बारिश से पेहले,
आशिक़ भी तरसते है।

ये इश्क़ सूफियाना है,
न कोई इसको समझ पायेगा।
इस डराया में जितना तारेगा,
उतना डूबता ही जाएगा।

इश्क़ उस जमाने मे ,
जिसमे लैला मजनू थे।
इस काली घनेरी रात में,
वो चमकते जुगनू थे।

मैं नही कहता ये,
की इश्क़ करना बुरा हैं।
पर जमाने के बातो से,
डरना बुरा है।

हम इश्क़ में डूबे हैं सनम,
हमे पार कौन लगाएगा।
जो बचने आयेग सनम,
वह खुद भी डूब जाएगा।

शिव वंदना

मेरे हर खयाल में,
मुस्किलो के जंजाल में,
मैं तुझको याद करता हु,
मैं तुझको याद करता हु।

बारिश की उस बून्द में,
सर्दी की उस धुंध में,
मैं तुझको याद करता हु,
मैं तुझको याद करता हु।

मेरे दिल की हर आस में,
मेरे सासो की भी सास में,
मैं तुझको याद करता हु,
मैं तुझको याद करता हु।

दिन के उज्जले में,
रातों के काले में,
मैं तुझको याद करता हु,
मैं तुझको याद करता हु।

हवाओ में फिज़ाओ में,
उन अंधेरी गुफाओ में,
मैं तुझको याद करता हु,
मैं तुझको याद करता हु।

इस मन के मंदिर में,
इस दिल के अंदर में,
मैं तुझको याद करता हु,
मैं तुझको याद करता हु।

मैंने देखा है चाँद को

मैंने देखा है चाँद को,
तारो से बात करते हुए।
वो दूर उस सूरज बैठी है,
जिस रोशिनी से चमकाते हुए।

पतझड़ में पेड़ो का रूप बिगड़ जाता है,
अंधी पानी से खेतो का हाल बुरा हो जाता है।
जैसे सोना तपकर ही और सुद्ध हो जाता है,
वैसे ही इश्क़ मुस्किलो में और खरा हो जाता है।

दीवाने बहुत हैं जमाने मे,
पर मेरा दिल बस नेक है।
तारे बहुत है आसमान में,
पर चाँद सिर्फ़ एक है।

उन सब मे मिलावट है,
जो मेरे इश्क़ के विरुद्ध हुआ।
खरा सोना बस मैं हु,
जो इश्क़ में तप के सुद्ध हुआ।

उज्जाले में अंधेरे में,
हर वक्त तुझे बस मैं देखु।
मेरे दिल की महफ़िल में,
मैं अपना दिल तुझपे फेकू

शायरी

बारिश के पानी मे,
जीवन की कहानी में।
हर एक कसती चलती है,
कभी डूबती कभी निकलती है।
पर जिस कसती को थमा तूने,
वो कसती किनारे को चूमे।
चाहे वो कसती  हो या दिल,
हवा का रुख तय करता है उसकी मंजिल।
तू उसी हवा की तरह,
मुझे किनारा देती है।
और मैं एक कसती की तरह,
तेरा साथ बहता जाता हूं।

आग में परवाने जलने आते है,
मैं भी जला हु इस इश्क़ की आग में।
संगीतकार की संगीत में भी आग है,
मैं जुलस गया इश्क़ के दीपक राग में।

तू जो मुझे छोड़ के चली गई,
तोह मैं जैसे टूट गया।
मेरे मन मे बसी तुम हो,
आँख बंद कर दीदार किया।



जिंदगी के खेल में

ज़िन्दगी के खेल में,
जीतने की नही थी कोई आस।
लोगो ने फेका अपना पासा,
पर हार गए सब हुए निरास।
और मुझे कोई हरा न सका,
क्योकि तुम थी बस मेरे पास।

शायरी

कवि की कविता तुम,
शायर की शायरी भी।
अगर मैं तुझको ढूंढता नहीं,
तो मिलती नही तुम कभी भी।

जबतक इस सीने में,
थोडी सी जान बाकी है,
तबतक मेरे पीने में,
इस इश्क़ की साकी हैं।

जिसके पास तुम नही,
राजा होकर भी गरीब हैं।
मैन दुनिया जीत लिया ,
जो तू मेरे करीब हैं।

तेरा मेरे पास होने से जमाने में,
कहर गिरा और जलजला आया।
पर तेरे इश्क़ को मैन ऐसा थमा,
की कोई तूफान मुझे हिला न पाया।

अब सब बेगाना लगता है पर,
हो तुम मेरी ज़िंदगी की सास।
सीने से ये दिल निकाल कर,
रख लो अपने दिल के पास।


मेरे जीने की उम्मीद हो तुम,
तेरे बिना मैं एक ज़िंदा लाश।
तू जो मुझको मिल गयी,
मेरे जीवन की खत्म तलाश।




शायरी

मैं कह न पाया सनम,
इस दिल के सारे दर्दे गम।
मेरे इश्क़ के चिराग में,
दिल जला है तन्हाई के आग में।

हर पल हु खोजता तुजे,
कभी घर मे कभी जिगर में।
पर मिली है तू मुझे,
हर दर्द में हर कहर में।

जबभी लिखा तेरे लिए,
एक इश्क़ का पैगाम था।
मैं डूब गया था तेरी मोब्बत में,
न मेरे हाथ मे जाम था।

जमाना तुझसे दूर न कर पाए।
मैं जिया हु ऐसी ज़िन्दगी,
मैंने तोड़े सारे रिस्ते अभी,
बस लगाई तेरी बंदगी।

अब मैं तेरे खातिर बस,
छोड़ दूंगा ये जमाना।
चाहे लोग फिर कुछ बोले,
मैं बस हु तेरा दीवाना।

मैं शायर हुआ कवि बना,
इस इश्क़ की ताप में।
जमाने ने किया हर बार मना,
पर मैं रमा हु आप में।

मेरा ये जो एक दिल है,

मेरा ये जो एक दिल है,
उसमें तुम ही रहते हो।
कोई पूछे या ना पूछे,
तुम मेरे हो ये कहते हो।

तेरी इस मासूम हँसी में,
मेरे बचपन को झलकती है।
तुजसे इतना प्यार है मुझको,
की दूर होने का गम रुलाती है।

तेरी नन्ही आंखों में,
प्यार का समंदर है।
तेरे प्यारे मन मे तो,
करुणा का अंबार है।

मेरा ये जो एक दिल है,
उसमें तुम ही रहते हो।
कोई पूछे या ना पूछे,
तुम मेरे हो ये कहते हो।

जबभी तुम अपने कदम बढ़ाओगे,
मेरा साथ हरपाल तुम पाओगे।
और फिर तुम अपनी मेहनत से,
हर काम सफल कर पाओगे।

यश लक्ष्मी को जीत कर,
तुम मेरा नाम बढ़ाओगे।
तुम अपने सत्कर्मो से,
तुम मेरा मान बढ़ाओगे।

तुम मेरे सपने को जीकर,
तुम उसको पूरा करते हो

मेरा ये जो एक दिल है,
उसमें तुम ही रहते हो।
कोई पूछे या ना पूछे,
तुम मेरे हो ये कहते हो।

मेरी आँखों की चमक

मेरी आंखों की चमक तू है,
तू मेरी जान है।
जबभी देखता हूं तुझको,
लगे तू मेरी पहचान है।
जब तू कोई अच्छा काम करे,
तोह उसमे मेरी शान है।
तू मेरा गर्भ ही नही,
तू मेरा अभिमान हैं।

मेरी आंखों की चमक तू है,
तू मेरी जान है।

मेरी आँखों में बसे हो तुम,
इस दिल मे तेरा बेसरा हैं।
चंद जैसा रूप है तेरा,
सूरज सा किया सवेरा है।
तभी तोह तेरे आने से हुआ,
रोशन यह घर मेरा है।

अब मेरी सारी ख्वाइश तू,
तू ही मेरी जान है।

तेरी ओर कोई गम आये ,
तोह मैं उसके रुख को मोड़ दु।
तेरी हर खुशी के खातिर,
मैं सारी दुनिया छोड़ दु।

मेरे सारे सपने तू,
तू ही मेरी जान है।
जबभी तुझको देखू लगे,
जैसे तू मेरी पहचान है।