Monday, August 31, 2020

मैंने देखा है चाँद को

मैंने देखा है चाँद को,
तारो से बात करते हुए।
वो दूर उस सूरज बैठी है,
जिस रोशिनी से चमकाते हुए।

पतझड़ में पेड़ो का रूप बिगड़ जाता है,
अंधी पानी से खेतो का हाल बुरा हो जाता है।
जैसे सोना तपकर ही और सुद्ध हो जाता है,
वैसे ही इश्क़ मुस्किलो में और खरा हो जाता है।

दीवाने बहुत हैं जमाने मे,
पर मेरा दिल बस नेक है।
तारे बहुत है आसमान में,
पर चाँद सिर्फ़ एक है।

उन सब मे मिलावट है,
जो मेरे इश्क़ के विरुद्ध हुआ।
खरा सोना बस मैं हु,
जो इश्क़ में तप के सुद्ध हुआ।

उज्जाले में अंधेरे में,
हर वक्त तुझे बस मैं देखु।
मेरे दिल की महफ़िल में,
मैं अपना दिल तुझपे फेकू

No comments:

Post a Comment