बारिश के पानी मे,
जीवन की कहानी में।
हर एक कसती चलती है,
कभी डूबती कभी निकलती है।
पर जिस कसती को थमा तूने,
वो कसती किनारे को चूमे।
चाहे वो कसती हो या दिल,
हवा का रुख तय करता है उसकी मंजिल।
तू उसी हवा की तरह,
मुझे किनारा देती है।
और मैं एक कसती की तरह,
तेरा साथ बहता जाता हूं।
आग में परवाने जलने आते है,
मैं भी जला हु इस इश्क़ की आग में।
संगीतकार की संगीत में भी आग है,
मैं जुलस गया इश्क़ के दीपक राग में।
तू जो मुझे छोड़ के चली गई,
तोह मैं जैसे टूट गया।
मेरे मन मे बसी तुम हो,
आँख बंद कर दीदार किया।
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