राम ने धनुष उठाकर वार किया,
आपनी गर्जना से आकाश को भर दिया ।
खंड खंड हो गए दानव,
जब क्रोध में आया यह महा मानव ।
काल , बेताल सब नाचते है ,
करते राम का आदर सत्कार,
जनम लिए अवद में विष्णु के मानव अवतार।
खुशिया आ गई अवद में,
हुआ हर्षा विस्तार ।
कोटि सूर्य ठंडे पड़ गए ,
कोटि चंद्र भी शर्म से मर गए ।
बहाव रुका पवन का ,
जब देखा रूप रघुनंदन का ।
दुष्टों का हुआ उथार ,
पंहुचा दिया सवर्ग के द्वार ,
राम ने किया सब का बेडा पर ,
लगाया सबको भवसागर के पार ।
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